शुक्रवार, 31 मार्च 2017

गिध्द का भूख

एक गिद्ध का बच्चा अपने माता-पिता के साथ रहता था।
एक दिन गिद्ध का बच्चा अपने पिता से बोला-
"पिताजी, मुझे भूख लगी है।
ठीक है, तू थोड़ी देर प्रतीक्षा कर। मैं अभी भोजन लेकर आता हूँ।
कहते हुए गिद्ध उड़ने को उद्धत होने लगा।
तभी उसके बच्चे ने उसे टोक दिया, "रूकिए पिताजी, आज मेरा मन
इन्सान का गोश्त खाने का कर रहा है।
ठीक है, मैं देखता हूं। कहते हुए गिद्ध ने चोंच से अपने पुत्र का सिर
सहलाया और बस्ती की ओर उड़ गया।
बस्ती के पास पहुंच कर गिद्ध काफी देर तक इधर-उधर मंडराता रहा,
पर उसे कामयाबी नहीं मिली।
थक-हार का वह सुअर का गोश्त लेकर अपने घोंसले में पहुंचा। उसे
देख कर गिद्ध का बच्चा बोला, "पिताजी, मैं तो आपसे इन्सान का
गोश्त लाने को कहा था, और आप तो सुअर का गोश्त ले आए?''
पुत्र की बात सुनकर गिद्ध झेंप गया।
वह बोला, "ठीक है, तू थोड़ी देर प्रतीक्षा कर।
कहते हुए गिद्ध पुन: उड़ गया।
उसने इधर-उधर बहुत खोजा, पर उसे कामयाबी नहीं मिली।
अपने घोंसले की ओर लौटते समय उसकी नजर एक मरी हुई गाय पर
पड़ी।
उसने अपनी पैनी चोंच से गाय के मांस का एक टुकड़ा तोड़ा और उसे
लेकर घोंसले पर जा पहुंचा।
यह देखकर गिद्ध का बच्च एकदम से बिगड़ उठा, "पिताजी, ये तो
गाय का गोश्त है। मुझे तो इन्सान का गोश्त खाना है।
क्या आप मेरी इतनी सी इच्छा पूरी नहीं कर सकते?''
यह सुनकर गिद्ध बहुत शर्मिंदा हुआ।
उसने मन ही मन एक योजना बनाई और अपने उद्देश्य की पूर्ति के
लिए निकल पड़ा।
गिद्ध ने सुअर के गोश्त एक बड़ा सा टुकड़ा उठाया और उसे मस्जिद
की बाउंड्रीवाल के अंदर डाल दिया।
उसके बाद उसने गाय का गोश्त उठाया और उसे मंदिर के पास फेंक
दिया।
मांस के छोटे-छोटे टुकड़ों ने अपना काम किया और देखते ही पूरे शहर
में आग लग गयी। रात होते-होते चारों ओर इंसानों की लाशें बिछ
गयी।
यह देखकर गिद्ध बहुत प्रसन्न हुआ। उसने एक इन्सान के शरीर से
गोश्त का बड़ा का टुकड़ा काटा और उसे लेकर अपने घोंसले में जा
पहुंचा।
यह देखकर गिद्ध का पुत्र बहुत प्रसन्न हुआ। वह बोला, "पापा ये
कैसे हुआ? इन्सानों का इतना ढेर सारा गोश्त आपको कहां से मिला?
गिद्ध बोला, बेटा ये इन्सान कहने को तो खुद को बुद्धि के मामले में
सबसे श्रेष्ठ समझता है, पर जरा-जरा सी बात पर 'जानवर' से भी
बदतर बन जाता है और बिना सोचे-समझे मरने- मारने पर उतारू हो
जाता है।
इन्सानों के वेश में बैठे हुए अनेक गिद्ध ये काम सदियों से कर रहे हैं।
मैंने उसी का लाभ उठाया
और इन्सान को जानवर के गोश्त से जानवर से भी बद्तर बना दिया।
साथियो, क्या हमारे बीच बैठे हुए गिद्ध हमें कब तक अपनी उंगली
पर नचाते रहेंगे?
और कब तक हम जरा-जरा सी बात पर अपनी इन्सानियत भूल कर
मानवता का खून बहाते रहेंगे?
अगर आपको यह कहानी सोचने के लिए विवश कर दे,
तो प्लीज़ इसे दूसरों तक भी पहुंचाए।
क्या पता आपका यह छोटा सा प्रयास इंसानों के बीच छिपे हुए
किसी गिद्ध को इन्सान बनाने का कारण बन जाए।
धन्यवाद -

सोमवार, 29 अगस्त 2016

टेंशन फ्री रहना हैं तो अपनाएं ये 9 जरूरी टिप्स


आज कल की लाइफ लोगों के लिए बेहद ही व्यस्त रहती है। हर कोई काम के बोझ से टेंशन में रहता है। किसी को ऑफिस तो किसी को घर-परिवार से जुड़ी समस्याओं के कारण परेशान रहता है। इसका हल निकालने के बजाय लोग खुद फ्रस्टेट हो जाते हैं और ऐसे में कई बीमारियों से घिर जाते हैं।
 aapkijaankari.blogspot.com आपको बता रहा है कि टेंशन फ्री रहने के लिए अपने लाइफ में कुछ चीजों को अपनाने से आपकी समस्या कुछ हद तक कम हो सकती है।
वर्तमान में रहना सीखें
लोगों के जीवन में ऐसी कई घटनाएं होती हैं, जिनके बारे में सोच कर अपना भविष्य अधर में डाल लेते हैं। भूतकाल (Past) के बारे में बार-बार सोचते रहने से वर्तमान में हो रहे कार्यों में भी बाधा आती है और कई टेंशन और भी बढ़ जाती हैं। ऐसे में हमें वर्तमान के बारे में ही विचार करना चाहिए और अपने भविष्य को और भी बेहतर बनाने के बारे में सोचना चाहिए।
खुद से सकारात्मक बातें करें
न सिर्फ लोगों के साथ ही सकारात्मक बातें करें बल्कि खुद अपने साथ बात भी करें। लोगों और अपने प्रति ऐसे विचार लाएं जो सकारात्मक हो। यदि आप सुबह उठने के बाद दो मिनट का अंतर्ध्यान करें और अपने बारे में कुछ अच्छा या भविष्य में क्या अच्छा करें, इसके बारें में सकारात्मक भाव लाएं।
मुस्कुराना और हंसना सीखें
आप चाहे घर पर हों, ऑफिस में हों या फिर कहीं घूमने जाएं; अपने फेस पर हमेशा मुस्कुराहट बनाए रखना चाहिए। हंसने और मुस्कुराने से स्ट्रेस तो दूर रहता है और नकारात्मक ख्याल भी नहीं आते। ऐसा करने से आपके आसपास का माहौल भी हंसमुख रहता है। उदास और चिड़चिड़हाट चेहरे से लोग भी बातचीत करना पसंद नहीं करते।
दोस्तों और करीबी लोगों से बातचीत करें
यदि आप समय-समय पर अपने दोस्तों से या करीबी लोगों से बातचीत करते रहेंगे और अपने विचार या अनुभव शेयर करेगें तो भी आपका स्ट्रेस दूर हो जाता है। यदि आप व्हाट्सएप या फेसबुक पर भी बात करते हैं तो भी आपके स्ट्रेस को दूर करने में मदद करता है।
जरूर सोएं 6 घंटे
काम का बोझ, पढ़ाई या फिर बचे हुए कामों को पूरा करने के लिए कुछ लोग देर रात तक जागते हैं। ऐसा करना भी गलत है, क्योंकि मानव शरीर को कम से कम 6 घंटे की नींद जरूरी होती है। नींद पूरी न होने से पूरे दिन थकान रहती है, गुस्सा आता रहता है और किसी भी कार्य में मन नहीं लगता है। यदि आप 6 घंटे नींद पूरी कर लेते हैं तो आप पूरे दिन फ्रेश महसूस करेंगे।
जरूर करें व्यायाम, योग और मेडिटेशन
स्वस्थ शरीर और स्वस्थ मन के लिए व्यायाम, योग और मेडिटेशन बेहद जरूरी है। इससे न सिर्फ आपके बॉडी फिट रहती है बल्कि तनावमुक्त भी रहता है। यही नहीं, यदि आपको नकारात्मक विचार आते है तो यह भी दूर करता है। रिसर्च से यह सामने आ चुकी है कि रोजाना 15 मिनट किया गया व्यायाम, योग या मेडिटेशन हमारे शरीर को स्वस्थ रखता है। शरीर स्वस्थ रहने से काम में मन लगता है और स्ट्रेस नहीं होता।
अपने मनपसंद का काम करें
ऐसा माना जाता है कि जब हम अपने मनपसंद का काम करते हैं तो तब हम बेहद खुशी महसूस करते हैं। ऐसा करने से आप स्ट्रेस से हमेशा दूर रहेंगे। इसलिए हर इंसान को अपनी लाइफ में उसी कार्य को करियर बनाना चाहिए, जिसमें उसकी रुचि हो। ऐसा करने से आप पर काम का बोझ जैसी कोई समस्या नहीं होगी, बल्कि तब आप और भी ज्यादा मन लगाकर काम कर सकेंगे और सकारात्मक तरीके से काम कर सकेंगे।
किताबें पढ़े और म्यूजिक सुनें
कहते हैं तनाव को दूर करने के लिए किताब पढ़ना या म्यूजिक सुनना बेहद जरूरी है। जब भी आपको स्ट्रेस महसूस करें तो अपना मनपसंद संगीत सुनें या फिर किताबें पढ़ने का शौक हो तो ऐसी किताब पढ़ें, जिससे आपके खुशी महसूस हो। ऐसा करने से कुछ ही देर में आपका तनाव दूर हो जाएगा।
आध्यामिक में रुचि लें और प्रार्थना करें
यदि आपके कभी ध्यान दिया हो तो आध्यात्मिक में मग्न रहने वाले व्यक्ति अक्सर मानसिक तनाव से दूर रहते हैं। ऐसा इसलिए क्योंकि वह एक अलौकिक शक्ति पर विश्वास करते हैं जो उन्हें मानसिक तनाव से बचाती है। आध्यात्मिक व्यक्ति जीवन में अपना ध्यान हमेशा केंद्रित रखता है। आत्मनिर्भरता बढ़ाने के लिए यदि प्रतिदिन प्रार्थना करेंगे तो आपको कभी भी मानसिक तनाव नहीं आने देती।
Thank you Dosto......
आपको यह artical कैसा लगा, आप comments कर के जरूर बताये ।

गुरुवार, 4 अगस्त 2016

लीडर बनना है तो इन 6 बातों का रखना पड़ेगा पूरा ध्यान

    दुनिया कैसी होगी और कैसे चलेगी आखिर इसे दिशा कैसे मिलती है। वो लीडर्स ही होते हैं जिनके दिखाए रास्ते पर आज दुनिया इस मुकाम तक पहुंची है। 12 से ज्यादा किताबें लिख चुके प्रसिद्ध लीडरशिप एक्सपर्ट रॉबिन शर्मा बता रहे हैं कि लीडरशिप स्किल और सफलता के लिए किन चीज़ों का ख्याल रखना होता है।
दुनिया को हिला देने जैसा कुछ काम करने की तमन्ना हर दिल में होती है, लेकिन इसे अंजाम देने के लिए जिस शिद्दत से कोशिश होनी चाहिए, अकसर उसमें कसर रह जाती है। बड़ा काम करने के लिए जरूरी है एक तय समय के लिए उसमें खुद को डुबो देना और ध्यान भटकाने वाली चीजों के दायरे से खुद को दूर रखना।
अगर आप अपनी जिंदगी में अब तक का सबसे सर्वश्रेष्ठ काम करना चाहते हैं और उम्मीद रखते हैं कि आपकी प्रतिभा का अक्स सारी दुनिया देखे, तो यह संदेश आपके लिए बेशकीमती है। पांच मिनट का समय निकालिए, अपने फोन के नोटिफिकेशंस बंद कीजिए, खुल कर सांस लीजिए और अपना ध्यान केंद्रित करिए इस लेख पर, जो कि मेरी कई सालों की मेहनत का परिणाम है। मेरे पास बहुत सारे लोग आते हैं जो जिंदगी में कोई बड़ा काम करना चाहते हैं। कोई बिजनेस एंपायर खड़ा करना चाहता है, कोई क्रिएटिव क्षेत्र में झंडे गाड़ना चाहता है। हाल में एक नई किताब पर काम करते हुए मुझे कई नियमों को समझने का मौका मिला, जो किसी बड़े प्रोजेक्ट या लक्ष्य को पूरा करवाने में मददगार होते हैं। ऐसे ही कुछ नियम हैं..
अपने खोल से बाहर निकलें 
आप अपने शहर में और अपने रुटीन की जिंदगी में बंधे रह कर बेहतरीन काम नहीं कर सकते। जब मुङो कोई खास काम करना होता है तो मैं किसी अच्छे होटल के कमरे में एक हफ्ते तक ‘डू नॉट डिस्टर्ब’ का बोर्ड लगाए रहता हूं। अपने सारे गैजेट्स को एक प्लास्टिक बैग में रख देता हूं। जब जरूरत होती है तो कुछ खाने के लिए ऑर्डर कर देता हूं, जब थक जाता हूं तो सो जाता हूं, जब वर्कआउट की जरूरत महसूस होती है, तो वर्कआउट कर लेता हूं। मेरा मानना है कि ऐसी जगहों पर आप एकांत पा सकते हैं। अपनी ट्रांजिएंट हाइपोफ्रंटैलिटी (जीनियस होने की न्यूरोबायोलॉजिकल स्थिति, जो हम सभी के पास होती है, पर जिसे महसूस करना और जिसके असर में आकर सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करना कुछ ही जानते हैं) को जान पाते हैं। 
उपलब्ध न रहने का तमगा इतना भी बुरा नहीं
आपकी सामाजिक जिंदगी है। आप काफी व्यस्त रहते हैं। लोग आपकी सलाह को तवज्जो देते हैं। मैं इसे गलत नहीं कहता, पर यह भी सच है कि ये आपका ध्यान भटकाने वाली चीजें हैं, जो आपको जीनियस बनने से रोक रही हैं। अगर आप अपने आस-पास घट रही हर छोटी-छोटी घटना पर ध्यान नहीं देंगे तो भी दुनिया का काम चलता रहेगा। दरअसल आप जो मास्टरपीस बनाना चाहते हैं, उसके बनने की प्रक्रिया ज्यादा अहम है। उसे बनाने के लिए एक तय वक्त के लिए बाहरी दुनिया से कट जाइए। आप पाएंगे कि जेहन में खुद-ब-खुद रचनात्मक विचार आ रहे हैं। 
स्पार्टा के सिपाही की तरह काम करें
अपने काम करने के कमरे में ध्यान भटकाने वाले फैंसी गैजेट्स व मनोरंजक पत्र-पत्रिकाएं न रखें। खाने-पीने की लजीज चीजों को हटवा दीजिए। अब आप एक स्पार्टा के सिपाही की तरह हैं। जिसे दुनिया वाले आपके काम करने का कमरा समझते हैं, उसे अपने काम में ध्यान लगाने के लिए एक मठ बना लीजिए। मशहूर वैज्ञानिक थॉमस एडिसन ने मेनलो पार्क नामक जगह पर अपनी लेबोरेटरी बनाई थी। यहीं पर उन्होंने बल्ब और फोनोग्राफ का अविष्कार किया था। मान लीजिए कि आप एडिसन हैं। आपका कमरा मेनलो पार्क वाली रिसर्च लेबोरेटरी। यही वह जगह है, जहां आप विचारों को पनपने का मौका देते हैं। अपने सिद्धांतों पर अमल करते हैं।
काम में लय पैदा करें
अपनी किताब ‘दि फाइव एएम क्लब’ लिखने के दौरान मैंने यूरोप के एक छोटे से कस्बे में प्रचलित काम करने का एक अनूठा तरीका अपनाया। मैं सुबह सोकर उठता, कॉफी पीता और लिखने में जुट जाता। सुबह के ताजगी भरे माहौल में तीन घंटे जमकर लिखने के बाद मैं तालाब के पास दौड़ लगाने जाता। फिर कुछ देर जिम में वर्कआउट करने के बाद लंच में हल्का खाना खाकर फिर लेखन में जुट जाता। कुछ और घंटों के बाद मैं 60 मिनट की वॉक पर निकलता। शाम को मनपसंद खाना खाता। मैं ऐसा हर दिन करता हूं। मुङो लगता है कि काम करने का जो तरीका मेरी कार्यक्षमता बढ़ा रहा है, वह आपकी भी बढ़ाएगा। 
अपनी प्रेरणा के स्त्रोत तलाशें
सात दिनों तक लगातार लिखने के बाद मैं खुद को रीचार्ज करना चाह रहा था। मैंने आईपैड उठाया और वसंत में खिलने वाले फूलों की तस्वीरें खींचीं, धूप का मजा लिया, स्थानीय होटल में खाना खाया। कला प्रदर्शनी देखी। ऐसा करने पर मुझे खुशी मिली। अगर काम करते हुए दोस्तों से बात करने या झपकी लेने का मन करे तो विचलित न हों। इन्हें अपनी सफलता में रोड़ा न बनने दें। आपके करीबी आपको सफल देखना चाहते हैं। जब आपका सितारा चमकेगा तो उनकी जिंदगी भी रोशन हो उठेगी।
अपनी जीत पर खुद को दें इनाम
एक क्रिएटिव प्रोफेशनल के रूप में काम करते हुए मैंने पिछले 25 सालों से टेलीविजन नहीं देखा। इन 25 सालों में सिर्फ मेरा परिवार, फिटनेस, व्यक्तिगत विकास और मेरी रचनात्मकता ही मेरी प्राथमिकता रहीं। मैं ऐसा शोहरत या पैसा पाने के लिए नहीं करता। मैं इसलिए करता हूं, क्योंकि ये मेरी जरूरत है। मेरा दिल मुझसे ऐसा करवाता है। मुझे बस यही आता है। इस यात्र के दौरान मैं दिन भर लिखने के बाद अपना पसंदीदा खाना खाता था। यही मेरा इनाम होता था। उम्मीद है आपको यह पढ़ते समय वही पैशन महसूस हुआ होगा, जो मुझे इसे लिखते समय महसूस हुआ। अपने अंदर की आग को पहचानिए। उसे दुनिया के सामने लेकर आइए। इतिहास रचिए।
     Best Of Luck ...................,
   दोस्तों हममें से हर कोई अपनी life में कुछ न कुछ जरुर करना चाहता है, लेकिन हमें उसके लिएtime ही नहीं मिलता । For example- हम ये सोचते हैं कि हम ये सीखेंगे, ऐसा करेंगे-वैसा करेंगे…अपने main goal की तरफ थोडा आगे बढ़ेंगे लेकिन हकीकत में हम आगे बढ़ते नहीं। और ऐसा न कर पाने का एक common excuse है कि “हमें वक़्त ही नहीं मिलता !”
इसलिए आज मैं आपके लिए कुछ ऐसे रियल लाइफ examples लाया हूँ जिनके बारे में जानकर आप सच में inspire होंगे। ये हमें समय के पाबंद होने के लिए प्रेरित तो करते ही हैं साथ में ये भी बताते हैं कि कोई इंसान कितना भी busy होकर भी अपने मनपसंद काम में कैसे आगे बढ़ सकता है:
  1. USA के famous Mathematician Charles F ने रोज केवल एक घंटा Maths सीखने का नियम बनाया था और उस नियम पर अंत तक डटे रहकर ही Maths में महारथ हासिल की।
  2. ईश्वरचन्द्र विद्यासागर जब कॉलेज जाते थे तो रास्ते के दुकानदार अपनी घड़ियाँ उन्हें देखकर ठीक करते थे। वे जानते थे कि विद्यासागर कभी एक मिनट भी आगे-पीछे नहीं चलते।
  3. मोजार्ट ने हर घडी उपयोगी कार्य में लगे रहना अपना जीवन का आदर्श बना लिया था। उन्होंने रैक्युम नामक famous ग्रन्थ मौत से लड़ते-लड़ते पूरा किया।
  4. ब्रिटिश कामनवेल्थ के मंत्री का अत्याधिक व्यस्त उत्तरदायित्व निभाते हुए मिल्टन ने ‘पैराडाइस लॉस्ट‘ कि रचना की। राजकाज से उन्हें बहुत कम समय मिल पाता था तो भी जितने कुछ मिनट वह बचा पाते उसी में उस काव्य पर काम कर लेते।
  5. Gallileo की medical shop थी फिर भी उसने थोडा-थोडा समय बचाकर विज्ञानं के महत्वपूर्ण आविष्कार कर डाले।
  6. Henry Kirak ने घर से office तक पैदल आने-जाने के समय का सदुपयोग करके Greek सीख ली। फौजी डॉक्टर बनने पर उनका अधिकांश समय घोड़े की पीठ पर बीतता था। उन्होंने उस समय भी Italian और French भाषा सीख ली।
  7. Edward Vatlar ने राजनीति और parliament के कार्यक्रमों में busy रहते हुए भी 60 ग्रंथों की रचना कर ली। वह कहते हैं कि उन्होंने रोज तीन घंटे का समय पढने और लिखने के लिए fix किया था।
  8. रोज चाय बनाने के लिए पानी उबालने में जितना समय लगता है , उसमे व्यर्थ न बैठकर लान्गफैले ने इन्फरल ग्रन्थ का अनुवाद कर लिया।
  9. Napolean ने ऑस्ट्रिया को इसलिए हरा दिया क्योंकि वहां के सैनिक उसका सामना करने के लिए पाँच मिनट देरी से आये।
  10. Waterloo के युद्ध में Napolean इसलिए बंदी बना लिया गया क्योंकि उसका सेनापति पाँच मिनट देरी से आया।
  11. महात्मा गाँधी दातुन करने से पहले शीशे पर गीता का श्लोक चिपका लिया करते थे और दातुन करते समय याद कर लिया करते थे, इस तरह से उन्होंने गीता के 13 अध्याय याद कर लिए।
It is very surprising that कोई केवल रोज एक घंटे पढ़कर expert बन गया तो किसी ने पैदल चलने का time का भी use किया तो किसी ने पानी उबलने का time भी use किया। कोई पाँच मिनट की देरी से हार जाता है तो कोई ऐसा ही कि लोग अपनी घडी से ज्यादा उसके समय की पाबंदी पर भरोसा है और कोई ऐसा भी है जो मौत से लड़ते लड़ते भी किताब लिखता है।
जब लोग उसी २४ घंटे में इतना कुछ कर सकते हैं तो प्रश्न उठता है कि आखिर हमारा समय कहाँ बर्बाद हो रहा है ?
Really, हमे हमारा goal achieve करने के लिए जितना time चाहिए उससे कहीं ज्यादा time हमारे पास होता है। बस जरुरत है उस अमूल्य समय को बर्बाद होने से बचाने की।
क्या किया जा सकता है :
  • आप ऊपर लिखे examples में से कुछ को चुनकर एक slip पर लिख लें और ऐसी जगह चिपका दें जहाँ आप रोज इन्हे पढ़कर inspire हो सकें।
  • आप भले ही कितनी भी time management टिप्स पढ़ लें लेकिन आपको सबसे पहले किसी काम को टालने की आदत से बचना होगा। याद रखिये कि किसी काम को करना उतनी तकलीफ नहीं देता जितना उसका टालना। इस टिप को follow कर लेने
    से ही आप बन जायेंगे एक Smart Time Manager .
  • आपने ये कथन बहुत बार सुना होगा –
 काल करै सो आज कर, आज करै सो अब।
पल में परले होइगी, बहुरि करेगा कब।। 
          लेकिन अब समय है इसको follow करने का।
  • सुबह उठते ही 10 से 15 मिनट में आप पुरे दिन की एक time-table बना सकते हैं। कभी कभी हम उत्साह में Time-table काफ़ी कठिन बना लेते हैं लेकिन हमे हमेशा time-table simple ही बनाना चाहिए ताकि आप इसमें successful होके खुद को super-motivate कर सकें।
I am sure, आप पहले भी टाइम को सही तरीके से use करने के लिए प्रयास कर चुके होंगे। कुछ लोग सफल भी हुए होंगे, और जो नहीं हुए उनके पास हमेशा एक और मौका होता है। दोस्तों, ब्रूस ली ने कहा है-
If you love life, don’t waste time, for time is what life is made up of.
अगर आप अपनी ज़िन्दगी से प्यार करते हैं तो वक़्त मत बर्वाद करें , क्योंकि वो वक़्त ही है जिससे ज़िन्दगी बनी होती है।
तो चलिए, एक बार फिर समय के महत्त्व को महत्त्व देते हैं, और “टाइम ही नहीं मिलता ” कहना छोड़ कर उन चीजों के लिए वक़्त निकालते हैं जो सचमुच ज़रूरी हैं।
Thanks!

शनिवार, 19 मार्च 2016

मजदूर के जूते

एक बार एक शिक्षक संपन्न परिवार से सम्बन्ध रखने वाले एक युवा शिष्य के साथ कहीं टहलने निकले . उन्होंने देखा की रास्ते में पुराने हो चुके एक जोड़ी जूते उतरे पड़े हैं , जो संभवतः पास के खेत में काम कर रहे गरीब मजदूर के थे जो अब अपना काम ख़त्म कर घर वापस जाने की तयारी कर रहा था .
शिष्य को मजाक सूझा उसने शिक्षक से कहा , “ गुरु जी क्यों न हम ये जूते कहीं छिपा कर झाड़ियों के पीछे छिप जाएं ; जब वो मजदूर इन्हें यहाँ नहीं पाकर घबराएगा तो बड़ा मजा आएगा !!”
शिक्षक गंभीरता से बोले , “ किसी गरीब के साथ इस तरह का भद्दा मजाक करना ठीक नहीं है . क्यों ना हम इन जूतों में कुछ सिक्के डाल दें और छिप कर देखें की इसका मजदूर पर क्या प्रभाव पड़ता है !!”
शिष्य ने ऐसा ही किया और दोनों पास की झाड़ियों में छुप गए .
मजदूर जल्द ही अपना काम ख़त्म कर जूतों की जगह पर आ गया . उसने जैसे ही एक पैर जूते में डाले उसे किसी कठोर चीज का आभास हुआ , उसने जल्दी  से जूते हाथ में लिए और देखा की अन्दर कुछ सिक्के पड़े थे , उसे बड़ा आश्चर्य हुआ और वो सिक्के हाथ में लेकर बड़े गौर से उन्हें पलट -पलट कर देखने लगा . फिर उसने इधर -उधर देखने लगा , दूर -दूर तक कोई नज़र नहीं आया तो उसने सिक्के अपनी जेब में डाल लिए . अब उसने दूसरा जूता उठाया , उसमे भी सिक्के पड़े थे …मजदूर भावविभोर हो गया , उसकी आँखों में आंसू आ गए , उसने हाथ जोड़ ऊपर देखते हुए कहा – “हे भगवान् , समय पर प्राप्त इस सहायता के लिए उस अनजान सहायक का लाख -लाख धन्यवाद , उसकी सहायता और दयालुता के कारण आज मेरी बीमार पत्नी को दावा और भूखें बच्चों को रोटी मिल सकेगी .”
मजदूर की बातें सुन शिष्य की आँखें भर आयीं . शिक्षक ने शिष्य से कहा – “ क्या तुम्हारी मजाक वाली बात की अपेक्षा जूते में सिक्का डालने से तुम्हे कम ख़ुशी मिली ?”                                                                                                 शिष्य बोला , “ आपने आज मुझे जो पाठ पढाया है , उसे मैं जीवन भर नहीं भूलूंगा . आज मैं उन शब्दों का मतलब समझ गया हूँ जिन्हें मैं पहले कभी नहीं समझ पाया था कि लेने  की अपेक्षा देना कहीं अधिक आनंददायी है . देने का आनंद असीम है . देना देवत्त है .”  thanks...

शनिवार, 5 सितंबर 2015

बदलाव

                             बूढ़े  दादा  जी  को  उदास  बैठे  देख  बच्चों  ने  पूछा , “क्या  हुआ  दादा  जी  , आज  आप  इतने  उदास  बैठे  क्या  सोच  रहे  हैं ?”
“कुछ  नहीं  , बस  यूँही  अपनी  ज़िन्दगी  के  बारे  में  सोच  रहा  था !”, दादा  जी बोले .
“जरा  हमें  भी  अपनी  लाइफ  के  बारे  में  बताइये  न …”, बच्चों  ने  ज़िद्द्द  की .
Old Man Hindi बूढ़ा आदमीदादा  जी कुछ देर सोचते रहे और फिर बोले , “ जब  मैं  छोटा  था  , मेरे  ऊपर  कोई  जिम्मेदारी  नहीं  थी , मेरी  कल्पनाओं  की  भी  कोई  सीमा  नहीं  थी …. मैं  दुनिया  बदलने  के  बारे  में  सोचा  करता  था …
जब  मैं  थोड़ा  बड़ा  हुआ  …बुद्धि  कुछ  बढ़ी ….तो  सोचने  लगा  ये  दुनिया  बदलना  तो  बहुत  मुश्किल काम है …इसलिए  मैंने  अपना  लक्ष्य  थोड़ा  छोटा  कर  लिया … सोचा  दुनिया  न  सही  मैं  अपना  देश  तो  बदल  ही  सकता  हूँ .
पर  जब  कुछ  और  समय  बीता , मैं  अधेड़  होने  को  आया  … तो  लगा  ये  देश  बदलना  भी  कोई  मामूली बात  नहीं  है …हर कोई ऐसा नहीं कर सकता है …चलो  मैं  बस  अपने  परिवार  और  करीबी  लोगों  को  बदलता  हूँ …
पर  अफ़सोस  मैं  वो  भी  नहीं  कर  पाया .
और  अब  जब  मैं  इस  दुनिया  में  कुछ  दिनों  का  ही  मेहमान  हूँ  तो  मुझे  एहसास  होता  है  कि   बस अगर  मैंने  खुद  को  बदलने  का   सोचा  होता  तो  मैं  ऐसा  ज़रूर  कर  पाता …और  हो   सकता  है  मुझे  देखकर  मेरा  परिवार  भी  बदल  जाता …और  क्या  पता  उनसे  प्रेरणा  लेकर  ये  देश  भी  कुछ  बदल जाता … और  तब   शायद  मैं  इस  दुनिया  को  भी  बदल  पाता !
ये कहते-कहते दादा जी की आँखें नम हो गयीं और वे धीरे से बोले, “बच्चों ! तुम  मेरी  जैसी  गलती  मत  करना …कुछ  और  बदलने  से  पहले  खुद  को  बदलना  …बाकि  सब   अपने  आप  बदलता  चला जायेगा .”
Friends, हम  सभी  में  दुनिया  बदलने  की  ताकत  है  पर  इसकी  शुरआत  खुद से ही  होती  है . कुछ  और  बदलने  से  पहले  हमें  खुद  को  बदलना  होगा …हमें  खुद  को  तैयार  करना  होगा …अपनी  skills को  strengthen करना  होगा …अपने  attitude को  positive बनाना  होगा …अपनी  determination को   फौलाद  करना   होगा …और  तभी  हम  वो  हर  एक  बदलाव  ला  पाएंगे  जो  हम  सचमुच  लाना  चाहते  हैं .
दोस्तों , इसी  बात  को  महात्मा  गांधी  ने  बड़े  प्रभावी   ढंग  से  कहा  है  …
Be the change that you want to see in the world.
खुद वो बदलाव बनिए जो आप दुनिया में  देखना चाहते हैं.
तो  चलिए  आज  से  हम  खुद  वो  बदलाव  बनते  हैं  जो  हम  दुनिया  में  देखना  चाहते  हैं.

मंगलवार, 25 अगस्त 2015

विदुर नीति

         महात्मा विदुर धर्म के अवतार माने जाते हैं। माण्डव ऋषि के श्राप से उन्हें शूद्रयोनि में जन्म लेना पड़ा। ये महाराज विचित्रवीर्य की दासी के गर्भ से उत्पन्न हुए थे। इस प्रकार ये पाण्डु और धृतराष्ट्र के एक तरह से सगे भाई थे। विदुर बड़े ही बुद्धिमान, नीतिज्ञ, धर्मज्ञ , विद्वान , सदाचारी एवं भगवद्भक्त थे।
Mahatma Vidur महात्मा विदुर“विदुर नीति” महाभारत का एक प्रमुख भाग है जिसमे महात्मा विदुर जी ने राजा धृतराष्ट्र को लोक-परलोक में कल्याण करने वाली बातें बताई हैं। आइये हम उनके कुछ अनमोल वचनों को जानते हैं :

1. जो अच्छे कर्म करता है और बुरे कर्मों से दूर रहता है , साथ ही जो ईश्वर में भरोसा रखता है और श्रद्धालु है , उसके ये सद्गुण पंडित होने के लक्षण हैं।
2. जो अपना आदर-सम्मान होने पर ख़ुशी से फूल नहीं उठता , और अनादर होने पर क्रोधित नहीं होता तथा गंगाजी के कुण्ड के सामान जिसका मन अशांत नहीं होता , वह ज्ञानी कहलाता है।।
3. मूढ़ चित्त वाला नीच व्यक्ति बिना बुलाये ही अंदर चला आता है , बिना पूछे ही बोलने लगता है तथा जो विश्वाश करने योग्य नहीं हैं उनपर भी विश्वाश कर लेता है।
4. जो बहुत धन , विद्या तथा ऐश्वर्यको पाकर भी इठलाता नहीं चलता , वह पंडित कहलाता है।
5. मनुष्य अकेला पाप करता है और बहुत से लोग उसका आनंद उठाते हैं। आनंद उठाने वाले तो बच जाते हैं ; पर पाप करने वाला दोष का भागी होता है।
6. किसी धनुर्धर वीर के द्वारा छोड़ा हुआ बाण संभव है किसी एक को भी मारे या न मारे। मगर बुद्धिमान द्वारा प्रयुक्त की हुई बुद्धि राजा के साथ-साथ सम्पूर्ण राष्ट्र का विनाश कर सकती है।।
7. विदुर धृतराष्ट्र को समझाते हुए कहते हैं : राजन ! जैसे समुद्र के पार जाने के लिए नाव ही एकमात्र साधन है , उसी प्रकार स्वर्ग के लिए सत्य ही एकमात्र सीढ़ी है , कुछ और नहीं , किन्तु आप इसे नहीं समझ रहे हैं।
8. केवल धर्म ही परम कल्याणकारक है , एकमात्र क्षमा ही शांति का सर्वश्रेष्ठ उपाय है। एक विद्या ही परम संतोष देने वाली है और एकमात्र अहिंसा ही सुख देने वाली है।
9. विदुर धृतराष्ट्र से कहते हैं : राजन ! ये दो प्रकार के पुरुष स्वर्ग के भी ऊपर स्थान पाते हैं – शक्तिशाली होने पर भी क्षमा करने वाला और निर्धन होने पर भी दान देनेवाला ।
10. काम, क्रोध , और लोभ – ये आत्मा का नाश करने वाले नरक के तीन दरवाजे हैं , अतः इन तीनो को त्याग देना चाहिए।
11. भरतश्रेष्ठ ! पिता , माता अग्नि ,आत्मा और गुरु – मनुष्य को इन पांच अग्नियों की बड़े यत्न से सेवा करनी चाहिए।
12. ऐश्वर्य या उन्नति चाहने वाले पुरुषों को नींद, तन्द्रा (उंघना ), डर, क्रोध ,आलस्य तथा दीर्घसूत्रता (जल्दी हो जाने वाले कामों में अधिक समय लगाने की आदत )- इन छ: दुर्गुणों को त्याग देना चाहिए।
13. मनुष्य को कभी भी सत्य ,दान , कर्मण्यता , अनसूया (गुणों में दोष दिखाने की प्रवृत्तिका अभाव ), क्षमा तथा धैर्य – इन छः गुणों का त्याग नहीं करना चाहिए।
14. मन में नित्य रहने वाले छः शत्रु – काम, क्रोध, लोभ , मोह , मद तथा मात्सर्य को जो वश में कर लेता है , वह जितेन्द्रिय पुरुष पापों से ही लिप्त नहीं होता, फिर उनसे उत्पन्न होने वाले अनर्थों की बात ही क्या है।
15. ईर्ष्या करने वाला , घृणा करने वाला , असंतोषी , क्रोधी , सदा संकित रहने वाला और दूसरों के भाग्य पर जीवन-निर्वाह करने वाला – ये छः सदा दुखी रहते हैं।
16. बुद्धि, कुलीनता, इन्द्रियनिग्रह, शास्त्रज्ञान, पराक्रम, अधिक न बोलना, शक्ति के अनुसार दान और कृतज्ञता – ये आठ गन पुरुष की ख्याति बढ़ा देते हैं।
17. जो धुरंधर महापुरुष आपत्ति पड़ने पर कभी दुखी नहीं होता, बल्कि सावधानी के साथ उद्योग का आश्रय लेता है तथा समयपर दुःख सहता है, उसके शत्रु तो पराजित ही हैं।
18. जो कभी उद्यंडका-सा वेष नहीं बनाता, दूसरों के सामने अपने पराक्रम की डींग नही हांकता , क्रोध से व्याकुल होने पर भी कटुवचन नहीं बोलता, उस मनुष्य को लोग सदा ही प्यारा बना लेते हैं।
19. किसी प्रयोजन से किये गए कर्मों में पहले प्रयोजन को समझ लेना चाहिए। खूब सोच-विचार कर काम करना चाहिए, जल्दबाजी से किसी काम का आरम्भ नहीं करना चाहिए।
20. मछली बढ़िया चारे से ढकी हुई लोहे की कांटी को लोभ में पड़कर निगल जाती है, उससे होने वाले परिणाम पर विचार नहीं करती।

A Request/एक अनुरोध

              दोस्तों aapkijaankari.blogspot.in  के माध्यम से मैं आपसे एक बहुत ही आवश्यक अनुरोध करना चाहता हूँ. पर अनुरोध करने से पहले मैं आपसे कुछ बातें करना चाहूँगा.
भारत में यदि सबसे ज्यादा कोई भाषा बोली और समझी जाती है तो वह है Hindi. पूरी दुनिया में हिंदी, चाईनीज के बाद दूसरी सबसे ज्यादा बोले जाने वाली मात्र भाषा है. 2001 Census Report के हिसाब से भारत में 41% से ज्यादा लोगों की मात्र भाषा हिंदी है. और इसके आलावा भी करोड़ो लोग हैं जिनकी मात्र भाषा बंगाली, मराठी, आदि है मगर हिंदी उनके लिए second language का काम करती है. निश्चित रूप से 2010 में इस संख्या में अच्छा खासा इजाफ़ा हो चुका होगा, तो अब कुछ नहीं तो 55-60 करोड़ लोग होंगे जो Hindi को आसानी से समझते होंगे.
चलिए एक और छोटी सी estimation  करते हैं : अगर बहुत positive अनुमान भी लगाया जाये तो इन 60 करोड़ लोगों में से मुश्किल से 10 करोड़ लोग होंगे जो English  भी उतनी ही सहजता से समझ लेते होंगे जितनी कि वो हिंदी समझ लेते हैं. पर फिर भी ऐसे 5o करोड़ लोग हैं जिन्हें Hindi ही अच्छे से समझ आती है.
अब  एक और बात, आज के इस दौर में सूचना के महत्त्व से कोई इंकार नहीं कर सकता है. चाहे किसी class 5 के बच्चे को कोई project बनाना हो या फिर किसी Research Scholar  को अपनी Ph.D पूरी करनी हो, सभी को सूचना यानि information चाहिए. यदि आज से दस साल पहले कि बात करें तो सूचना पाने के लिए या तो हम कोई book खोजते थे या फिर किसी और से उसके बारे में पूछते थे. लेकिन आज तो हमें कोई भी सूचना चाहिए हो तो हम बस Google महाराज को निर्देश दे देते हैं , और वो एक आदर्श सेवक कि तरह हमारे सामने सूचनाओं का अम्बार लगा देते हैं. पर दिक्कत ये है कि उनकी ज्यादातर सूचनाएं अंग्रेजी में होती हैं. चलिए एक उदाहरण लेते हैं :
मैंने गूगल पे सर्च किया “how to discover your life purpose”तो result कुछ यूं था—
पांच करोड़ तेईस लाख results 0.19 सेकंडस में
इस रिजल्ट के माध्यम से मुझे एक से बढ़ कर एक articles पढ़ने को मिले. जो सच-मुच मेरी personal-growth के लिए काफी लाभदायक हैं.
फिर मैंने गूगल पे सर्च किया “अपने जिंदगी का मकसद कैसे पता करें” तो result कुछ यूं था –
चौदह हज़ार पांच सौ results 0.07 सेकंड्स में 
इसमें भी अगर आप ध्यान दें तो दूसरे रिजल्ट का title है “ इंदिरा गाँधी की हत्या का पूरा सच ”,
और बाकी रिजल्ट्स भी किसी मतलब के नहीं हैं. यानि Hindi results में ना Quantity है ना Quality.
तो क्या इसका ये मतलब है कि जो लोग अंग्रेजी जानते हैं बस उन्हें ही ज्ञानवर्धक, अच्छे लेख जो वाकई में जिंदगी को सही दिशा और दशा दे सकते हैं; पढ़ने को मिलने चाहियें? क्या ये आपकी-हमारी जिम्मेदारी नहीं है की हम अपने लोगों के लिए कुछ करें?
देखिये दो चीजें हो सकती हैं . पहली – हम उन करोड़ो लोगों को अंग्रेजी सिखा दें, जो इतनी जल्दी संभव नहीं है या दूसरी हम अपने सम्मिलित प्रयासों से हिंदी भाषा में अंग्रेजी भाषा के समतुल्य या उससे भी बेहतर लेख इन्टरनेट पे उपलब्ध करा दें, जो निश्चित रूप से संभव है.
और यही आपसे मेरे अनुरोध है:
“ कृपया आप अपनी तरफ से कम से कम एक Hindi Article ज़रूर contribute करें.”
और अब, जब आप Hindi Typing उतनी ही आसानी से कर सकते हैं जितना की English Typing तो फिर चिंता किस बात की है. बस शुरू  हो जाइये.
आपके लेख किसी भी subject पे हो सकते हैं. जैसे:
  • आपके कार्य क्षेत्र से सम्बंधित उपयोगी जानकारियां. For Example: यदि कोई Architect का काम करता है तो वह मकान बनाते समय किन बातों का ध्यान रखें ?” इस विषय पर एक लेख लिख सकता है.
  • किसी Real Life Hero के बारे में कोई प्रेरणात्मक लेख.
  • कुछ ऐसी जानकारियां जो लोगो के लिए उपयोगी हो.
  • ऐसे लेख जो हमारे व्यकतित्व विकास (Personality Development) में सहायक हों.
  • इत्यादि.
आप अपने लेख/articles  हमें  ksushil923@gmail.com  पर भेज सकते हैं. 
 यदि आप ने पहले से ही कुछ अच्छे लेख लिख रखें  हैं तो आप उसे कंप्यूटर पे टाइप कर के या फिर SCAN  करा के भी हमें भेज सकते हैं. पसंद आने पर हम उसे आपके नाम और photo ( यदि आप चाहें) के साथ aapkijaankari.blogspot.in पर Publish करेंगे. Thanks.   

गुरुवार, 20 अगस्त 2015

सच्ची मदद

एक नन्हा परिंदा अपने परिवार-जनों से बिछड़ कर अपने आशियाने से बहुत दूर आ गया था । उस नन्हे परिंदे को अभी उड़ान भरने अच्छे से नहीं आता था… उसने उड़ना सीखना अभी शुरू ही किया था ! उधर नन्हे परिंदे के परिवार वाले बहुत परेशान थे और उसके आने की राह देख रहे थे । इधर नन्हा परिंदा भी समझ नहीं पा रहा था कि वो अपने आशियाने तक कैसे पहुंचे?
वह उड़ान भरने की काफी कोशिश कर रहा था पर बार-बार कुछ ऊपर उठ कर गिर जाता।
कुछ दूर से एक अनजान परिंदा अपने मित्र के साथ ये सब दृश्य बड़े गौर से देख रहा था । कुछ देर देखने के बाद वो दोनों परिंदे उस नन्हे परिंदे के करीब आ पहुंचे । नन्हा परिंदा उन्हें देख के पहले घबरा गया फिर उसने सोचा शायद ये उसकी मदद करें और उसे घर तक पहुंचा दें ।
उड़ान भरता पक्षी अनजान परिंदा – क्या हुआ नन्हे परिंदे काफी परेशान हो ?
नन्हा परिंदा – मैं रास्ता भटक गया हूँ और मुझे शाम होने से पहले अपने घर लौटना है । मुझे उड़ान भरना अभी अच्छे से नहीं आता । मेरे घर वाले बहुत परेशान हो रहे होंगे । आप मुझे उड़ान भरना सीखा सकते है ? मैं काफी देर से कोशिश कर रहा हूँ पर कामयाबी नहीं मिल पा रही है ।
अनजान परिंदा – (थोड़ी देर सोचने के बाद )- जब उड़ान भरना सीखा नहीं तो इतना दूर निकलने की क्या जरुरत थी ? वह अपने मित्र के साथ मिलकर नन्हे परिंदे का मज़ाक उड़ाने लगा ।
 उन लोगो की बातों से नन्हा परिंदा बहुत क्रोधित हो रहा था ।
अनजान परिंदा हँसते हुए बोला – देखो हम तो उड़ान भरना जानते हैं और अपनी मर्जी से कहीं भी जा सकते हैं । इतना कहकर अनजान परिंदे ने उस नन्हे परिंदे के सामने पहली उड़ान भरी । वह फिर थोड़ी देर बाद लौटकर आया और दो-चार कड़वी बातें बोल पुनः उड़ गया । ऐसा उसने पांच- छः बार किया और जब इस बार वो उड़ान भर के वापस आया तो नन्हा परिंदा वहां नहीं था ।
अनजान परिंदा अपने मित्र से- नन्हे परिंदे ने उड़ान भर ली ना? उस समय अनजान परिंदे के चेहरे पर ख़ुशी झलक रही थी ।
मित्र परिंदा – हाँ नन्हे परिंदे ने तो उड़ान भर ली लेकिन तुम इतना खुश क्यों हो रहे हो मित्र? तुमने तो उसका कितना मज़ाक बनाया ।
अनजान परिंदा – मित्र तुमने मेरी सिर्फ नकारात्मकता पर ध्यान दिया । लेकिन नन्हा परिंदा मेरी नकारात्मकता पर कम और सकारात्मकता पर ज्यादा ध्यान दे रहा था । इसका मतलब यह है कि उसने मेरे मज़ाक को अनदेखा करते हुए मेरी उड़ान भरने वाली चाल पर ज्यादा ध्यान दिया और वह उड़ान भरने में सफल हुआ ।
मित्र परिंदा – जब तुम्हे उसे उड़ान भरना सिखाना ही था तो उसका मज़ाक बनाकर क्यों सिखाया ?
अनजान परिंदा – मित्र, नन्हा परिंदा अपने जीवन की पहली बड़ी उड़ान भर रहा था और मैं उसके लिए अजनबी था । अगर मैं उसको सीधे तरीके से उड़ना सिखाता तो वह पूरी ज़िंदगी मेरे एहसान के नीचे दबा रहता और आगे भी शायद ज्यादा कोशिश खुद से नहीं करता ।
मैंने उस परिंदे के अंदर छिपी लगन देखी थी। जब मैंने उसको कोशिश करते हुए देखा था तभी समझ गया था इसे बस थोड़ी सी दिशा देने की जरुरत है और जो मैंने अनजाने में उसे दी और वो अपने मंजिल को पाने में कामयाब हुआ ।अब वो पूरी ज़िंदगी खुद से कोशिश करेगा और दूसरों से कम मदद मांगेगा । इसी के साथ उसके अंदर आत्मविश्वास भी ज्यादा बढ़ेगा ।
मित्र परिंदे ने अनजान परिंदे की तारीफ करते हुए बोला तुम बहुत महान हो, जिस तरह से तुमने उस नन्हे परिंदे की मदद की वही सच्ची मदद है !
Friends , सच्ची  मदद  वही  है  जो  मदद  पाने  वाले  को  ये  महसूस  न  होने  दे  कि  उसकी  मदद  की  गयी  है  . बहुत  बार  लोग  help तो  करते  हैं  पर  उसका  ढिंढोरा  पीटने  से  नहीं  चूकते . ऐसी  help किस  काम की  ! परिंदों  की  ये  कहानी  हम  इंसानो  के  लिए  भी  एक  सीख  है  कि  हम  लोगों  की  मदद  तो  करें  पर  उसे  जताएं नहीं !
Ankitaअंकिता आशू
क्वालिफिकेशन -एम .टेक , हैदराबाद
जन्मभूमि –बगहा (बिहार)
पिता का नाम –विजय प्रकाश पाठक
We are grateful to Ankita ji for sharing this inspirational story on “how to help people ?” . We wish him a great future ahead.
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रविवार, 16 अगस्त 2015

Dhirubhai Ambani Quotes in Hindi

                                                           
Dhirubhai Ambani Quotes in Hindi
                                                                    Dhirubhai Ambani
NameDheerubhai Ambani / धीरूभाई अंबानी
Born28 December 1932(1932-12-28)Chorwad, Gujarat, India
Died6 July 2002(2002-07-06) (aged 69)Mumbai, Maharashtra, India
NationalityIndian
FieldBusiness
Achievement
 Founded Reliance Industries, a Fortune 500 company. पेट्रोल पम्प पर काम करने से लेकर पेट्रो कैमिकल रीफाईनरी बनाने वाले इस महान व्यक्ति ने करोड़ों लोगों के लिए एक आदर्श स्थापित किया. इन्ही की वजह से एक आम- भारतीय भी स्टॉक मार्केट में रुचि दिखाने लगा. धीरुभाई ने साबित कर दिया कि साधारण से साधारण व्यक्ति भी बड़े से बड़ा सपना देख सकता है और उन्हें साकार कर सकता है.

धीरूभाई अंबानी के अनमोल विचार

Quote 1: एक  दिन  धीरुभाई  चला  जायेगा . लेकिन  Relaince के  कर्मचारी  और  शेयर  धारक  इसे  चलाते  रहेंगे . रिलायंस अब  एक  विचार  है  , जिसमे  अम्बानियों  का  कोई  अर्थ  नहीं  है .
 Dheerubhai Ambani  धीरूभाई अंबानी
Quote 2: बड़ा  सोचो , जल्दी  सोअचो , आगे  सोचो . विचारों  पर  किसी  का  एकाधिकार  नहीं  है .
 Dheerubhai Ambani  धीरूभाई अंबानी
Quote 3: हमारे  स्वप्न  विशाल   होने  चाहिए . हमारी  महत्त्वाकांक्षा  ऊँची  होनी  चाहिए . हमारी  प्रतिबद्धता  गहरी  होनी  चाहिए  और  हमारे  प्रयत्न  बड़े  होने  चाहिए . रिलायंस  और  भारत  के  लिए  यही  मेरा  सपना  है .
  Dheerubhai Ambani  धीरूभाई अंबानी
Quote 4:हम  अपने  शाशकों  को  नहीं  बदल  सकते  पर  जिस  तरह  वो  हम  पे  शाशन  करते  हैं  उसे  बदल  सकते  हैं .
  Dheerubhai Ambani  धीरूभाई अंबानी
Quote 5: फायदा  कमाने  के  लिए  न्योते  की  ज़रुरत  नहीं  होती .
  Dheerubhai Ambani  धीरूभाई अंबानी
Quote 6: रिलायंस  में  विकास  की  कोई  सीमा  नहीं  है . मैं  हमेशा  अपना   वीज़न  दोहराता  रहता  हूँ . सपने  देखकर  ही  आप  उन्हें  पूरा  कर  सकते  हैं .
  Dheerubhai Ambani  धीरूभाई अंबानी
Quote 7: यदि  आप  दृढ  संकल्प  और  पूर्णता  के  साथ  काम  करेंगे  तो  सफलता  ज़रूर  मिलेगी.
  Dheerubhai Ambani  धीरूभाई अंबानी
Quote 8: कठिन  समय  में  भी  अपने  लक्ष्य  को  मत  छोड़िये  और  विपत्ति  को  अवसर  में  बदलिए .
  Dheerubhai Ambani  धीरूभाई अंबानी
Quote 9: युवाओं  को  एक  अच्छा  वातावरण  दीजिये . उन्हें  प्रेरित  कीजिये . उन्हें  जो  चाहिए  वो   सहयोग  प्रदान  कीजिये . उसमे  से  हर  एक  आपार  उर्जा  का  श्रोत  है . वो  कर  दिखायेगा .
  Dheerubhai Ambani  धीरूभाई अंबानी
Quote 10: मेरे  भूत , वर्तमान  और  भविष्य  के  बीच  एक  आम  कारक  है  : रिश्ते  और  विश्वास  . यही  हमारे  विकास  की  नीव  हैं .
  Dheerubhai Ambani  धीरूभाई अंबानी
Quote 11: समय  सीमा  पर  काम  ख़तम  कर  लेना  काफी  नहीं  है  ,मैं  समय  सीमा  से  पहले  काम  ख़तम  होने  की  अपेक्षा  करता  हूँ .
 Dheerubhai Ambani  धीरूभाई अंबानी
                                निवेदन: कृपया अपने comments के मध्यम से बताएं कि Dhirubhai Ambani Quotes का हिंदी अनुवाद आपको कैसा लगा

धन्यवाद.....

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